
1. Medium of Exchange (विनिमय का माध्यम) – खरीद-बेच का आसान टूल!ये सबसे बेसिक काम है। पैसा वो चीज है जो हम खरीदने-बेचने में यूज करते हैं, बिना किसी झंझट के।आसान उदाहरण:
- तुम समोसा खाना चाहते हो। दुकानदार को पैसे दो (20 रुपये), वो समोसा दे देगा। हो गया!
- बिना पैसे के? तुम्हें दुकानदार को कुछ और देना पड़ता – जैसे अपना जूता या घड़ी । लेकिन पैसा सबको एक्सेप्टेबल है, इसलिए डील इंस्टेंट हो जाती है।
2. Store of Value (मूल्य संग्रह) – पैसा बचाओ, बाद में यूज करो!पैसा तुम्हें आज की मेहनत को कल के लिए बचाने देता है। मतलब आज कमाओ, बाद में खर्च करो।आसान उदाहरण:
- तुम आज 5000 रुपये सैलरी से बचाते हो। उसे पिग्गी बैंक या बैंक में रखो।
- अगले महीने नई शर्ट या फोन खरीदो। पैसा “वैल्यू स्टोर” करता है – तुम्हारी मेहनत की वैल्यू को होल्ड करके रखता है।
- (लेकिन हां, महंगाई से थोड़ी वैल्यू कम हो सकती है – जैसे पहले 20 रुपये में पूरा समोसा मिलता था, अब आधा ।
3. Unit of Account (मूल्य मापने की इकाई) – सबकी कीमत एक ही स्केल पर!पैसा वो “रूलर” है जिससे हम सब चीजों की वैल्यू मापते हैं और कंपेयर करते हैं।आसान उदाहरण:
- समोसा = 20 रुपये
- शर्ट = 500 रुपये
- फोन = 50,000 रुपये
- अब आसानी से कंपेयर करो: शर्ट समोसे से 25 गुना महंगी है! या फोन कितने समोसों के बराबर ।
- बिना पैसे के? कैसे कंपेयर करोगे?
3. Opportunity Cost (अवसर लागत) – जो छोड़ दिया, वो भी कीमत है! जब तुम एक चीज चुनते हो, तो दूसरी चीज अपने आप छूट जाती है। वो छूटी हुई चीज की वैल्यू ही Opportunity Cost है। मतलब – तुम्हारा फैसला फ्री नहीं है, उसकी हिडन कीमत होती है।उदाहरण: तुम्हारे पास 500 रुपये हैं।

- तुम समोसा खा लिए → मजा आया, लेकिन opportunity cost = वो मूवी टिकट जो तुम नहीं देख पाए।
- या तुमने नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन लिया → opportunity cost = वो नई शूज जो नहीं खरीद पाए।
अट्रैक्टिव ट्विस्ट: सोचो, तुम कॉलेज के बाद जॉब कर रहे हो। Opportunity cost क्या है? वो एक्स्ट्रा पढ़ाई या बिजनेस आइडिया जो तुम छोड़ रहे हो…
4. Time Value of Money (TVOM – पैसे का समय मूल्य) ये जादू है भाई! आज का 100 रुपये कल के 100 रुपये से ज्यादा कीमती है। क्यों? क्योंकि आज का पैसा तुम निवेश करके बढ़ा सकते हो!आसान उदाहरण:
- आज 100 रुपये बैंक में डालो → 1 साल बाद ब्याज से 110 हो जाएंगे।
- लेकिन कल कोई तुम्हें 100 रुपये देगा → वो सिर्फ 100 ही रहेंगे। आज वाला ज्यादा वैल्यू का क्योंकि वो “बढ़” सकता है।
मजेदार उदाहरण: अगर कोई कहे “आज 1000 रुपये लो या 5 साल बाद 2000 रुपये” – तुम आज वाला चुनोगे क्योंकि आज का पैसा निवेश करके और ज्यादा बना सकते हो। यही कंपाउंड इंटरेस्ट की नींव है (जो बाद में सीखेंगे – पैसा खुद पैसा कमाता है!)।
5. Risk (जोखिम) – लाइफ में सब कुछ गारंटी नहीं!हर फैसले में थोड़ी अनिश्चितता होती है – यही Risk है। पैसा रखने या खर्च करने में भी रिस्क है।उदाहरण:
- पैसा घर में रखो → चोरी का रिस्क।
- बैंक में रखो → महंगाई से वैल्यू कम होने का रिस्क।
- स्टॉक में निवेश करो → पैसा डबल हो सकता है, या आधा भी हो सकता है!
मजेदार उदाहरण: सड़क पार करना रिस्क है (एक्सीडेंट हो सकता है), लेकिन घर में बैठे रहो तो लाइफ बोरिंग हो जाएगी। फाइनेंस में भी – ज्यादा रिस्क = ज्यादा रिटर्न की पॉसिबिलिटी।
6. Value (मूल्य) – कीमत और वैल्यू अलग-अलग होते हैं!Price (कीमत) वो है जो दुकान पर लिखा होता है – जैसे फोन 50,000 रुपये। लेकिन Value (मूल्य) वो है जो वो चीज तुम्हारे लिए कितनी उपयोगी है।उदाहरण:
- एक अमीर आदमी के लिए 50,000 का फोन सस्ता लगेगा (हाई वैल्यू)।
- तुम्हारे लिए वही फोन महंगा लग सकता है अगर तुम्हें उसकी जरूरत न हो (लो वैल्यू)।
- या एक पुराना फोन 10,000 में मिले जो तुम्हारे सारे काम कर दे – उसकी वैल्यू ज्यादा!