Basic terms of Personal Finance

  • Income (आय)
    वो पैसा जो तुम कमाते हो – सैलरी, बिजनेस से कमाई, फ्रीलांसिंग, किराया या कोई भी स्रोत। ये तुम्हारी जेब में आने वाला पैसा है, जिससे बाकी सब शुरू होता है।
  • Expense (खर्च)
    वो पैसा जो तुम खर्च करते हो – किराना, बिल, घूमना-फिरना, शॉपिंग। जितना कम खर्च करोगे, उतना ज्यादा बचेगा। बस यही तो खेल है!
  • Budget (बजट)
    एक प्लान जो बताता है कि तुम्हारी इनकम का पैसा कहां-कहां जाएगा। जैसे “इस महीने 30% खर्च, 20% सेविंग”। बजट बनाओ तो पैसे तुम्हारे कंट्रोल में रहते हैं।
  • Saving (बचत)
    इनकम में से खर्च घटाकर जो पैसा बच जाता है, वो सेविंग है। इसे बैंक में रखो, ताकि जरूरत पड़े तो काम आए। छोटी-छोटी बचत भी बड़ा फर्क डालती है।
  • Debt (कर्ज)
    वो पैसा जो तुमने किसी से उधार लिया है – लोन, क्रेडिट कार्ड बिल। इसे जल्दी चुकाओ, वरना ब्याज के साथ बोझ बढ़ता जाता है।
  • Asset (एसेट/संपत्ति)
    वो चीजें जो तुम्हारी हैं और जिनसे पैसा आ सकता है – घर, गाड़ी, शेयर, बैंक बैलेंस, गोल्ड। ये तुम्हारे लिए काम करती हैं।
  • Liability (देयता)
    वो चीजें जिनके लिए तुम्हें पैसा देना पड़ता है – लोन, क्रेडिट कार्ड का बकाया, बिल। जितनी कम लायबिलिटी, उतनी अच्छी फाइनेंशियल हेल्थ।
  • Net Worth (नेट वर्थ)
    तुम्हारी सारी एसेट्स का कुल मूल्य minus सारी लायबिलिटीज। मतलब तुम वाकई कितने “अमीर” हो। इसे बढ़ाते रहो!
  • Emergency Fund (इमरजेंसी फंड)
    3-6 महीने के खर्चों जितना पैसा अलग से रखो, जो अचानक मुसीबत (नौकरी चली जाए, बीमारी) में काम आए। ये तुम्हारा सेफ्टी नेट है।
  • Credit Score (क्रेडिट स्कोर)
    एक नंबर (300-900) जो बताता है कि तुम लोन चुकाने में कितने भरोसेमंद हो। अच्छा स्कोर = आसानी से लोन और कम ब्याज। समय पर बिल चुकाओ तो स्कोर अच्छा रहता है।
  • Inflation (महंगाई)
    समय के साथ चीजें महंगी होती जाती हैं। आज का 100 रुपये का सामान 5 साल बाद 130 का हो सकता है। इसलिए सेविंग को इन्वेस्ट करो, वरना उसकी वैल्यू कम हो जाती है।
  • Compound Interest (चक्रवृद्धि ब्याज)
    “पैसे पर पैसा कमाना” का जादू। तुम्हारा निवेश किया पैसा ब्याज कमाता है, फिर वो ब्याज भी ब्याज कमाता है। जितनी जल्दी शुरू करो, उतना ज्यादा फायदा। ये अमीर बनने का सीक्रेट है!

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